Tuesday, January 7, 2014

आतम खोज

आतम खोज

आतम खोज बडा पुराना
अब तो आया नया जमाना

शीशे के मकान और पथर के दिल
भई ढुंढो मेरी आतम..
तुम्हे अपनी गयी क्या मिल??

आतम खोज बडा पुराना

अब रोश्नी को खोज ए मेरे दिल
ईन बरामदे और घरो में..
क्योंकि अब रोशन नहीं होते दिल!!

अब तो आय नया जमाना..

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