Monday, January 2, 2012

Experiences

मुझ पर जब एक आफत आई दौडी दौडी मां बाबुजी के पास आई
उन्हों ने कहा बेटा जरुर कुछ करते हम पर अब तो तु है पराई..
मुझ पर जब एक आफत आई तब मुझे याद आया मेरा भाई
विडंबना तो ये कि उसका तो मै कॉल भी रीच ना कर पाई..
मुझ पर जब एक आफत आई पति ने कहा तुम तो हो मेरी परछाई..
पर क्या करु प्रिये मुझ पर भी मुसिबतो ने है भिड जमाई..
दोस्तो ने कहा हमारे होते तुम पर ये कैसी आफत आई??
कल जरुर कुछ सोचेंगे..यार आज तीन के शो की टिक्टे है आई..
मुझ पर जब एक आफत आई सभी कि सिरत साफ नझर आई..
जान लिया दिल ने कि साथ नहीं देती खुद अपनी परछाई..

1 comment:

Anonymous said...
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