मुझ पर जब एक आफत आई दौडी दौडी मां बाबुजी के पास आई
उन्हों ने कहा बेटा जरुर कुछ करते हम पर अब तो तु है पराई..
मुझ पर जब एक आफत आई तब मुझे याद आया मेरा भाई
विडंबना तो ये कि उसका तो मै कॉल भी रीच ना कर पाई..
मुझ पर जब एक आफत आई पति ने कहा तुम तो हो मेरी परछाई..
पर क्या करु प्रिये मुझ पर भी मुसिबतो ने है भिड जमाई..
दोस्तो ने कहा हमारे होते तुम पर ये कैसी आफत आई??
कल जरुर कुछ सोचेंगे..यार आज तीन के शो की टिक्टे है आई..
मुझ पर जब एक आफत आई सभी कि सिरत साफ नझर आई..
जान लिया दिल ने कि साथ नहीं देती खुद अपनी परछाई..
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