मंज़िल तुम्हे ना दे पाए , पर रास्ता जरुर दिखलाएँगे
हमारे अधूरे अरमान तुम्हारे कुछ तो काम आएंगे
जहाँ हम लडखडाये वही तुम गिरो ये जरुरी तो नहीं
पर ये ज़ख्मों के निशान तुम्हे आगाह तो कर जाएंगे
कुछ अधूरी आशा टूटे ख्वाब की धरोहर है ज़िन्दगी
रखलो हमारी निशानियाँ , शायद तुम्हारे काम आये
हमारी राह तुम चलो ये अपनी चाहत तो नहीं
गर कभी रास्ता भूलो, ये निशान भटकने से बचाएंगे
हम तो उस दौर पे है जहाँ न सुख है न दुःख
तुम्हे देख कर फिर भी खुद पे कभी इतरायेंगे
खुद मंजिल को पा न सके, रास्ता तुम्हे जरुर दिखलाएँगे !!!
.
No comments:
Post a Comment