Wednesday, June 13, 2012

वृक्ष

हमारे अपने कुछ साथी है संगी है, आसमान में  उड़ते पंखी है 
जीवन में  लोग आते है जाते है, कुछ दे जाते है कुछ ले जाते है 
कोई है जिन्होंने  दुनिया देखी  है, कहीं दुनिया चार दीवारों मैं सिमटी है 
दुःख  आते है सुख  आते है, पतज़र - बहार  बनके छा  जाते है 
गाँव की गलियों में उग जाते  है, शहर  के बगिचों  में उगाये जाते है
कभी फल,फुल, छाया देते है,और सूख जाए तो जल जाते है 
हम वृक्ष है हम हर सु पाए जाते है, हम हर हालत में काम आते है !!!

2 comments:

Anonymous said...

Well thought! You could have made it very expressive though!! More of a poem for children, I felt. Nevertheless nicely written.

Shabd said...

thank you..