आग है इतनी सिने मैन कि खुद ही जल जायेंगे
वो बेवफा तो फौलाद है पिघलता ही नहि
इस दिल मैन है धड्कन किसि और की
और वो झालिम जिन्दगी बक्शना चाहता ही नहि
एक खयाल बेबस कर जाता है इस कदर
आदमी कभि थे काम के ये याद आता नहि
सब कुछ है पर हम ही नहि
खुदा, जन्नत, कयामत अब नजर कुछ आता नहि
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